चौदह विद्याएँ और चौसठ कलाएँ
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Language: Hindi & English

भारत की पहचान अत्यंत प्राचीन काल से एक अत्यंत समृद्ध और सुसंस्कृत देश के रूप में है। इसकी नींव प्राचीन शिक्षा पद्धति में है। जीवन का सर्वांगीण विकास करने वाली ज्ञान परंपरा और शिक्षा व्यवस्था हजारों वर्षों से इस भूमि में जीवित है, प्रवाहित है। प्राचीन ऋषि-मुनियों और विद्वान विचारकों ने मानव जीवन का सर्वांगीण और अत्यंत सूक्ष्म अध्ययन करके यह परंपरा निश्चित की है। इसमें भौतिक जीवन के साथ-साथ मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक उन्नति का विचार किया गया। सफल जीवन की परिभाषा करते हुए उन्होंने निःश्रेयस अभ्युदय जैसा अत्यंत उदात्त जीवन-लक्ष्य प्रत्येक के सामने रखा है। ऐहिक भौतिक अर्थात् सांसारिक जीवन में सर्वोत्तम प्रगति होनी चाहिए। संपत्ति, धन-धान्य, गाएं, पुत्र-पौत्र, घर, नौकर-चाकर, सोना-चांदी, आभूषण — ये सब तो चाहिए ही। साथ ही संतुष्ट, तृप्त और सहज मृत्यु और मृत्यु के बाद सद्गति — ऐसा जीवन प्रत्येक को जीने में सक्षम होना चाहिए, यही जीवन-लक्ष्य है। जीवन-लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है शिक्षा। इसीलिए इसके दो भाग किए गए — 1) विद्या और 2) कलाविद्या अर्थात् तत्त्वज्ञान, दृष्टिकोण, विचार... जीवन कैसे जीना चाहिए, जन्म से मृत्यु तक की यात्रा को जानना चाहिए, जीवन का लक्ष्य कैसे निर्धारित करें — यह चौदह विद्याएँ सिखाती हैं। 64 कलाएँ दैनंदिन जीवन से जुड़ी हैं। उनमें विज्ञान, तकनीक और कौशल हैं। अर्थोपार्जन करने और संसार चलाने के लिए अर्थात् संपत्ति और संसाधन प्राप्त करने का ज्ञान इन कलाओं को सीखने से मिलता है। विद्या और कला दोनों जीवन के लिए आवश्यक हैं। उनका समन्वय करके हम जीवन में सच्चे अर्थों में सफल हो सकते हैं। ये 14 विद्याएँ और 64 कलाएँ कौन-सी हैं? उनका आज के जीवन में हम कैसे उपयोग कर सकते हैं? जानते हैं इस कैप्सूल कोर्स में...

कैप्सूल कोर्स के विषय

✅ विद्या और कला.... संकल्पना और परिभाषा
✅ प्राचीन भारतीय शिक्षा संकल्पना
✅ 14 विद्याएँ कौन-सी हैं? प्रारंभिक परिचय
✅ विद्याओं का जीवन में स्थान और महत्व
✅ 64 कलाएँ कौन-सी हैं? प्रारंभिक परिचय
✅ 64 कलाओं का वर्गीकरण
✅ कलाओं का महत्व और उपयोगिता
✅ विद्या और कला की परस्पर पूरकता
✅ सफल जीवन के लिए विद्या और कला का संतुलन
✅आज के युग में 14 विद्याओं और 64 कलाओं का व्यावहारिक उपयोग

मार्गदर्शक
प्रा. क्षितीज पाटुकले

Author, Academician, Expert in Indian Knowledge System, Sanatan Vedic Hindu Dharma, Heritage & Cultural Expert, Entrepreneur & Digital Media Producer, etc

संस्थापक : भीष्म स्कूल ऑफ इंडियन नॉलेज सिस्टीम एवं भीष्म सनातन वैदिक हिंदू युनिव्हर्सिटी, अमेरिका

विशेषज्ञ मार्गदर्शक

मार्गदर्शन एवं प्रश्नोत्तर सत्र

रिकॉर्डिंग उपलब्ध

ऑनलाइन वर्ग – ZOOM के माध्यम से

06 से 10 जुलाई, 2026

शाम 08:00 से 09:15 बजे