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Language: Hindi & English
संपूर्ण विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ के रूप में वेदों की पहचान है। उनमें भी ऋग्वेद सबसे प्राचीन है। वेद केवल भारतीयों के लिए या सनातन वैदिक हिंदुओं के लिए नहीं हैं। वे संपूर्ण विश्व के लिए हैं। उनकी रचना भारत में हुई। भारत ने जगत को क्या दिया तो वेद दिए, उपनिषद दिए। रामायण-महाभारत जैसे महाकाव्य दिए। वेद और वैदिक ग्रंथसंपदा भारत का वैभव है। परंतु आज की शिक्षा पद्धति में वेदों के विषय में कोई ज्ञान या जानकारी नहीं दी जाती। वेद अपौरुषेय हैं। वेद अर्थात् ईश्वर की वाणी है, ऐसी श्रद्धा है। वेदों का कोई एक लेखक नहीं है। महर्षि बादरायण व्यास ने वेदों का वर्गीकरण करके उन्हें चार वेदों में विभाजित किया। हम केवल वेदों के नाम सुने हैं। परंतु उसके आगे हमें कुछ भी ज्ञात नहीं होता। वेद क्या हैं? संहिता क्या है? ब्राह्मण ग्रंथ क्या है? आरण्यक ग्रंथ क्या है? इसकी हमें जानकारी नहीं होती। वास्तव में प्रत्येक भारतीय को वेदों और वैदिक ग्रंथों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इससे हमें अपनी प्राचीन गौरवशाली धरोहर की पहचान होगी। वेदों में वर्णित विषयों की जानकारी होगी। वैदिक ज्ञान का परिचय होगा। वैदिक ज्ञान सभी के लिए उपलब्ध है। उस ज्ञान को अपने जीवन में अपनाया जा सकता है। वेदों की परंपरा मौखिक परंपरा है। संपूर्ण विश्व की अत्यंत प्राचीन इस मौखिक परंपरा के माध्यम से वैदिक ज्ञान हजारों वर्षों के बाद भी ज्यों-का-त्यों उपलब्ध है। उसमें कोई विकृति या मिलावट नहीं हुई है। संपूर्ण जगत में अत्यंत विशिष्ट ऐसी वैदिक परंपरा है। वेदों की रचना वैदिक ऋषियों ने तथा ब्रह्मवादिनी वैदिक स्त्रियों ने की है। इस कैप्सूल कोर्स में हम चार वेद, ब्राह्मण ग्रंथ और आरण्यक ग्रंथों का परिचय करेंगे।