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Language: Hindi & English
श्रुति और स्मृति में अंतर बहुत कम लोगों को ज्ञात होता है। श्रुति अर्थात् सुना हुआ — सुनकर लिखा हुआ, और स्मृति अर्थात् स्मरण करके, याद करके लिखा हुआ साहित्य। वैदिक साहित्य श्रुति ग्रंथ हैं। प्राचीन ऋषि-मुनियों को समाधि अवस्था में जो दैवी वाणी सुनाई दी और उन्होंने उसे लिख लिया — वे वैदिक ग्रंथ अर्थात् श्रुति ग्रंथ हैं। उसके बाद काल के प्रवाह में श्रुतियों के माध्यम से बताए गए ज्ञान का स्मरण करके, याद करके जो ग्रंथ तैयार हुए उन्हें स्मृति ग्रंथ कहते हैं। उन्हें स्मार्त भी कहा जाता है। मानव के कल्याण के लिए वेदों के ज्ञान का सिंहावलोकन करके, उस ज्ञान को युगानुकूल और कालोचित बनाकर सरल भाषा में उपलब्ध कराया गया — वे ग्रंथ अर्थात् स्मृति ग्रंथ हैं। उनका समावेश धर्मशास्त्रीय ग्रंथों में किया जाता है। प्राचीन वैदिक ग्रंथों में प्राप्त काल के अनुसार परिवर्तन करके सामाजिक, नीति-नियम, परस्पर व्यवहार, व्यक्तिगत और सामूहिक आचरण के नियम, कानून, न्याय व्यवस्था, सामाजिक कर्तव्य, जिम्मेदारियाँ, आचरण की मार्गदर्शक तत्त्व — ऐसी आचारसंहिता और नियमावली बताने वाले ग्रंथ अर्थात् स्मृति ग्रंथ हैं। सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय — ऐसा उनका व्यष्टि, समष्टि और परमेष्टि का संतुलन साधने वाला स्वरूप होता है। मुख्य स्मृति ग्रंथों की संख्या अठारह है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति और सबसे प्राचीन पराशर स्मृति का प्रमुख रूप से समावेश है। सनातन धर्म में स्मृति ग्रंथों को धर्माचरण, नैतिकता और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत ग्रंथ के रूप में मान्यता है। अठारह स्मृति ग्रंथों की रचना वैदिक काल से विभिन्न कालखंडों में हुई। उनमें उस-उस काल का प्रतिबिंब दिखाई देता है। श्रुतियों के ज्ञान का उस-उस काल में व्यावहारिक रूपांतरण अर्थात् स्मृति ग्रंथ हैं। इनके माध्यम से समाज व्यवस्था, दंड व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, प्रायश्चित व्यवस्था, उत्तराधिकार व्यवस्था के द्वारा सामाजिक संतुलन बनाए रखा जाता है। व्यक्तिगत, सामाजिक, दैनिक, नैमित्तिक कर्तव्यों की रूपरेखा निर्धारित की जाती है। साथ ही संस्कृति सक्षम होती है। सांस्कृतिक मूल्यों और नैतिक मूल्यों का पोषण होता है। संवर्धन होता है। आदर्शों का स्मरण होता है। स्मृतियों के माध्यम से सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक आचरण के लिए मार्गदर्शन प्राप्त होता है। इनमें राज्य व्यवहार, अर्थशास्त्र, प्रबंधन शास्त्र के विषय में भी मार्गदर्शन मिलता है। इस कैप्सूल कोर्स के माध्यम से हम मनुस्मृति और अठारह स्मृति ग्रंथों का परिचय करेंगे।
✅ श्रुति और स्मृति संकल्पना
✅ स्मृति ग्रंथ का इतिहास और कालखंड
✅ मनुस्मृति परिचय
✅ याज्ञवल्क्य स्मृति
✅ पराशर स्मृति
✅ विष्णु स्मृति, दक्ष स्मृति, संवर्त स्मृति
✅ व्यास स्मृति, हरित स्मृति, शातातप स्मृति, वसिष्ठ स्मृति
✅ यम स्मृति, आपस्तंब स्मृति, गौतम स्मृति और देवल स्मृति
✅ शंख स्मृति, औशनस स्मृति, अत्रि स्मृति और शौनक स्मृति
✅ स्मृति ग्रंथों का सनातन भारतीय सभ्यता में योगदान और कलियुग में उपयोगिता
मार्गदर्शक
Head, Research Department, Bhishma Santan Vedic Hindu University, USA