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Language: Hindi & English
सनातन भारतीय ज्ञान परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है — वह है विचारधन अर्थात् तत्त्वज्ञान। हम जिस पृथ्वी पर जन्मे हैं, वह पृथ्वी कैसी है? इस विश्व की रचना कैसे हुई? इसके मूलतत्त्व कौन से हैं? पंचमहाभूत कौन से हैं? यह अत्यंत विलक्षण और बहुरंगी, बहुढंगी, बहुविध पृथ्वी कैसे बनी! अगणित प्रकार के प्राणी, पशु, पक्षी, कीट, मछलियाँ, कछुए, जलचर, उभयचर, सरीसृप — लाखों-करोड़ों जीव यहाँ कैसे उत्पन्न हुए? उन्हें किसने बनाया? अंततः मनुष्य अर्थात् हम कैसे बने? हम कहाँ से आए? मृत्यु के बाद हम कहाँ जाएंगे? हमारा क्या होगा? हमारे शरीर का कार्य कैसे चलता है? हम अर्थात् केवल हमारा शरीर हैं क्या? — ऐसे अनेक गहन प्रश्नों पर प्राचीन ऋषि-मुनियों ने अत्यंत सूक्ष्म अध्ययन किया। चिंतन और मनन किया। उससे उन्होंने जो विचार प्रस्तुत किए उन्हें दर्शन कहते हैं। इनमें से षड्दर्शन आस्तिक या वैदिक दर्शन के रूप में जाने जाते हैं। यहाँ आस्तिक का अर्थ है — वेदों पर विश्वास रखने वाले, वेदों को मानने वाले दर्शन — इसलिए इन्हें वैदिक दर्शन भी कहते हैं। आस्तिक दर्शनों में भौतिक विज्ञान है। साथ ही मनोविज्ञान भी है। महर्षि कपिल ने सांख्य दर्शन रचा है। उसमें प्रकृति और पुरुष की द्वैत संकल्पना है। महर्षि पतंजलि ने योग दर्शन की रचना की है, जिसमें मनोविज्ञान है। महर्षि गौतम न्याय दर्शन के प्रणेता हैं। वैशेषिक दर्शन में महर्षि कणाद ने संपूर्ण विश्व में सर्वप्रथम अणु अर्थात् सूक्ष्मतम कण की संकल्पना प्रस्तुत की। जैमिनि ऋषि ने मीमांसा अर्थात् वेद के कर्मकांड पर भाष्य किया है। वेदांत की रचना महर्षि बादरायण ने की है। आज का आधुनिक विज्ञान और षड्दर्शनों में बड़ी समानता पाई जाती है। इसीलिए कहा जाता है कि विज्ञान अब वेदों की भाषा बोलने लगा है। इन दर्शनों में परमोच्च ज्ञान है। ऐहिक और भौतिक ज्ञान-विज्ञान के साथ-साथ ब्रह्मविद्या का भी परिचय इनसे होता है। प्रत्येक भारतीय को षड्दर्शनों का ज्ञान होना आवश्यक है — इसके लिए यह कैप्सूल कोर्स अत्यंत उपयोगी है।
✅ दर्शन संकल्पना और आवश्यकता
✅ दर्शनों का इतिहास और निर्माण की यात्रा
✅ वेद और दर्शनों का परस्पर संबंध
✅ सांख्य दर्शन
✅ योग दर्शन
✅ न्याय दर्शन
✅ वैशेषिक दर्शन
✅ पूर्व मीमांसा दर्शन
✅ उत्तर मीमांसा दर्शन
✅ वैदिक दर्शन की आज के युग में उपयोगिता
मार्गदर्शक
PhD (Commerce), M.Phil, MBA, M.Com, B.Com
Expert in Upanishad, Darshan Shashtra and Adi Shankaracharya